जाल मंच पर ई-लेख प्रकाशन का दूसरा प्रयास ।
8:01 PM   पर आशीष दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¥à¤·à¤¿à¤¤
At 11:39 AM, Srijan Shilpi said…
मामू जेएनयू में हमारे मित्रों में से रहे हैं। हमलोग उनकी पाककला और शेरो-शायरी के वर्षों से कायल रहे हैं। हालाँकि पाककला के मामले में मामी का योगदान कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। मामू का ढाबा मामी की बदौलत ही चलता है।
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1 Comments:
At 11:39 AM,
Srijan Shilpi said…
मामू जेएनयू में हमारे मित्रों में से रहे हैं। हमलोग उनकी पाककला और शेरो-शायरी के वर्षों से कायल रहे हैं। हालाँकि पाककला के मामले में मामी का योगदान कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। मामू का ढाबा मामी की बदौलत ही चलता है।
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