ई-लेखा

जाल मंच पर ई-लेख प्रकाशन का दूसरा प्रयास ।

Sunday, January 23, 2005

किसना - ना रे ना

यहाँ मोहाली में ठंड काफी हो गई है । कहीं घूमने नहीं जा सकते ।
सोचा क्यूँ ना फिल्म देखी जाए !
श्रीमती जी भी काफी दिनों से रट लगाएँ हुईं थी। सोचा एक पंथ दो काज वाली बात हो जाएगी ।
तो पिकाडिली सिनेमा घर में 3-6 का शो देखने चले गए। नयी पिक्चर "किसना" रिलीज हुई थी।
बिग बैनर सुभाष घई की पिक्चर थी तो काफी आशाएँ थी । पर सारी की सारी धूमिल हो गईं ।
इतनी अझेल थी कि हम तो खत्म होने से आधा घंटा पहले ही हाँल से बाहर आ गए ।
श्रीमती जी का गुस्सा देखते ही बनता था - कहने लगीं अगर घई महाशय कहीं मिल जाएँ तो दो कान के नीचे लगा कर पूछेंगे, क्या सोच कर ये बंडल बनाया ।।
किसना - ना रे ना

1 Comments:

  • At 3:51 PM, Blogger आलोक said…

    बहुमूल्य जानकारी देने के लिए धन्यवाद। वैसे मर्डर के बाद से एक भी हिन्दी फ़िल्म नहीं देखी है।

     

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