ई-लेखा

जाल मंच पर ई-लेख प्रकाशन का दूसरा प्रयास ।

Monday, January 17, 2005

माइलस्टोन

प्रिय आलोक, मिर्ची सेठ, ठाकुर व जितेंद्र ,
हौसला बढ़ाने व प्रशंसा के लिए कोटि कोटि धन्यवाद ।।
लगता है इस बार पहले प्रयास की तरह ई-लेखन से नौ दो ग्यारह नहीं हो जाऊँगा ।।

आलोक, अगर मुझे पहले वाले का लॉगिन पता होता तो दूसरे की नौबत ही नहीं आती ।
मि. सेठ, सही पहचाना , मैं उसी कम्पनी में कार्यरत हूँ जिसमें आलोक जैसी विराट प्रतिभा विद्यमान है ।

जितेंद्र भाई, जीवन के प्रथम 18 साल जयपुर में गुजरे, उसके बाद बनारस (बी. एच. यू), फिर कटनी, बँगलौर और अब मोहाली । आगे जहॉ रोजी रोटी लिखी हो... । आखिर हम मजदूर जो ठहरे, ज्ञानी मजदूर ( नोलिज वर्कर ) ।

आज का दिन मेरे ई-लेखन में मील का पत्थर है । एक तो यह चौथा ई-लेख है । दूसरा इतने मित्रगणों से पहचान व उनका सहयोग । पर चूँकि सब सॉफ्टवेयर वाले हैं, अत: इसे "माइलस्टोन" कहना ज्यादा ठीक होगा । कुछ लोग इससे शायद "ईजिली रिलेट" कर पायेंगे ।

रामराम ।

2 Comments:

  • At 1:31 PM, Blogger अनूप शुक्ला said…

    स्वागत का एक और संदेश मेरी तरफ से भी.तमाम मील के पत्थर सफलतापूर्वक तय कर पाने के लिये शुभकामनायें

     
  • At 6:16 AM, Blogger मिर्ची सेठ said…

    अरे हट जाओ जरा साईड पे कोई मेरे शहर से चिट्ठे लिख रहा है। भाई कुछ स्थानीय खबरों का मसाला भी लिख दोगे तो मजा आ जाएगा। वैसे चंडीगढ़ में काफी ई-ग्रुपस हैं पर कोई भी चिट्ठा नहीं लिखता। वैसे अंग्रेजी वाले तो पक्का होंगे।

     

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