ई-लेखा

जाल मंच पर ई-लेख प्रकाशन का दूसरा प्रयास ।

Sunday, December 31, 2006

नया वर्ष

मित्रों,
नये वर्ष के अवसर पर कुछ उर्दू शायरी पेश है । ये खुशवंत सिंह की आत्मकथा से ली गई हैं ।
मेरा प्रयास तो इन्हें एक जगह पर इकट्ठा करने का रहा है ।

पैदा हुए वकील तो इबलीस ने कहा
अल्लाह ने मुझे साहिबे औलाद कर दिया ।
( The Day a lawyer was born, Satan Exulted,
Allah has blessed me with progeny of my own )

जहाँ में अहले अमन सूरते खुर्शीद जीते हैं
ईधर डूबे उधर निकले, उधर डूबे इधर निकले ।
( In this world, men of faith and self confidence are like the Sun,
They go down on one side to come up on the other )

वो वक्त भी देखा तरीख की घड़ियों ने
लम्हों ने खता की थी
सदियों ने सजा पाई ।

मुल्ला गर असर है दुआ में
तो मस्जिद हिला के दिखा
गर नहीं, तो दो घूँट पी
और मस्जिद को हिलता देख ।

सरसरी नजर मारी जहान अन्दर
जिन्दगी वर्ग उठहाल्या मैं
दामन कोई न मिलिया रफीक मैंनूँ
मार कफन दे बुकाल ते चलिया मैं ।
( I give a cursory glance at the world
I turned a few pages of the book of my life
I Daaman could find no companion - so
I fling my shroud over my shoulders
And I go )


ढूँढता फिरता हूँ, मैं, ए इकबाल, अपने आप को
आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूँ मैं ।

तू दिल में आता है
समझ में नहीं आता
बस जान गया तेरी पहचान यही है ।

सुने हिकायते हस्ती तो दर्मियाँ से सुने
ना ईब्तिदा की खबर है, ना ईंतहाँ मालूम ।
( All we have heard of the story of life is its middle
We know not its beginning,
We know not its end )

खुदा तुझे किसी तूफान से आशना कर दे
कि तेरे बेहर की मौजौं में इजतिराब नहीं
( May GOD bring storm into our life
There is no agitation on the waves of your life's ocean )

रौ में है रक्स और उमर
कहाँ देखिए थमें
ना हाथ बाग में है
ना पाँव नक्काली में
( My life runs at a galloping pace
who knows where it will come to a stop
The reins are not in my hands
my feet are not in the stirrups )

निशाने मर्दे मोमिन बा तू गोयम
चून मार्ग आयद, तबस्सुम बर लबे ओस्त
( You ask me for the signs of a man of faith
When death comes to him
He has a smile on his lips )

नया वर्ष आप सब को मुबारक हो ।।

5 Comments:

  • At 12:58 AM, Blogger Shrish Sharma said…

    वाह ! अच्छा संकलन किया आपने।

    नववर्ष बहुत-बहुत मुबारक आशीष जी।

     
  • At 3:05 PM, Blogger Nishikant Tiwari said…

    सामने सब के स्वीकार करता हूँ
    हिन्दी से कितना प्यार करता हूँ
    कलम है मेरी टूटी फूटी
    थोड़ी सुखी थोड़ी रुखी
    हर हिन्दी लिखने वाले का
    प्रकट आभार करता हूँ
    आप लिखते रहिए
    मैं इन्तज़ार करता हूँ ।
    NishikantWorld

     
  • At 11:28 AM, Blogger आशीष कुमार 'अंशु' said…

    Shyari ke chahane wale lagate hai..................

     
  • At 4:25 PM, Blogger Aditya said…

    I really liked ur post, thanks for sharing. Keep writing. I discovered a good site for bloggers check out this www.blogadda.com, you can submit your blog there, you can get more auidence.

     
  • At 9:21 AM, Blogger Surinder Singh said…

    बहुत खूब...
    हिन्दी कविताएँ

     

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