tag:blogger.com,1999:blog-101039192008-04-29T21:24:58.874+05:30ई-लेखाआशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comBlogger40125tag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-91390588425289251442006-12-31T08:13:00.000+05:302006-12-31T08:37:44.632+05:30नया वर्षमित्रों,<br />नये वर्ष के अवसर पर कुछ उर्दू शायरी पेश है । ये खुशवंत सिंह की आत्मकथा से ली गई हैं ।<br />मेरा प्रयास तो इन्हें एक जगह पर इकट्ठा करने का रहा है ।<br /><br />पैदा हुए वकील तो इबलीस ने कहा<br />अल्लाह ने मुझे साहिबे औलाद कर दिया ।<br />( The Day a lawyer was born, Satan Exulted,<br /> Allah has blessed me with progeny of my own )<br /><br />जहाँ में अहले अमन सूरते खुर्शीद जीते हैं<br />ईधर डूबे उधर निकले, उधर डूबे इधर निकले ।<br />( In this world, men of faith and self confidence are like the Sun,<br /> They go down on one side to come up on the other )<br /><br />वो वक्त भी देखा तरीख की घड़ियों ने<br />लम्हों ने खता की थी<br />सदियों ने सजा पाई ।<br /><br />मुल्ला गर असर है दुआ में<br />तो मस्जिद हिला के दिखा<br />गर नहीं, तो दो घूँट पी<br />और मस्जिद को हिलता देख ।<br /><br />सरसरी नजर मारी जहान अन्दर<br />जिन्दगी वर्ग उठहाल्या मैं<br />दामन कोई न मिलिया रफीक मैंनूँ<br />मार कफन दे बुकाल ते चलिया मैं ।<br />( I give a cursory glance at the world<br /> I turned a few pages of the book of my life<br /> I Daaman could find no companion - so<br /> I fling my shroud over my shoulders<br /> And I go )<br /><br /><br />ढूँढता फिरता हूँ, मैं, ए इकबाल, अपने आप को<br />आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूँ मैं ।<br /><br />तू दिल में आता है<br />समझ में नहीं आता<br />बस जान गया तेरी पहचान यही है ।<br /><br />सुने हिकायते हस्ती तो दर्मियाँ से सुने<br />ना ईब्तिदा की खबर है, ना ईंतहाँ मालूम ।<br />( All we have heard of the story of life is its middle<br /> We know not its beginning,<br /> We know not its end )<br /><br />खुदा तुझे किसी तूफान से आशना कर दे<br />कि तेरे बेहर की मौजौं में इजतिराब नहीं<br />( May GOD bring storm into our life<br /> There is no agitation on the waves of your life's ocean )<br /><br />रौ में है रक्स और उमर<br />कहाँ देखिए थमें<br />ना हाथ बाग में है<br />ना पाँव नक्काली में<br />( My life runs at a galloping pace<br /> who knows where it will come to a stop<br /> The reins are not in my hands<br /> my feet are not in the stirrups )<br /><br />निशाने मर्दे मोमिन बा तू गोयम<br />चून मार्ग आयद, तबस्सुम बर लबे ओस्त<br />( You ask me for the signs of a man of faith<br /> When death comes to him<br /> He has a smile on his lips )<br /><br />नया वर्ष आप सब को मुबारक हो ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1164726770948510322006-11-28T20:37:00.000+05:302006-11-28T20:44:47.463+05:30लोकतंत्रलोकतंत्र की परिभाषा व विभिन्न देशों का लोकतंत्र सूची में स्थान - ECONOMIST द्वारा ।।<br /><a href="www.economist.com/media/pdf/DEMOCRACY_INDEX_2007_v3.pdf">यहाँ पर चूहे का वार करें</a>आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1160225914478258782006-10-07T18:25:00.000+05:302006-10-07T18:31:25.283+05:30अगर तुम मिलने आ जाओमुझे गम है कि मैने ज़िन्दगी मे कुछ नहीं पाया<br />यह गम दिल से निकल जाये, अगर तुम मिलने आ जाओ<br />यह दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्से, काम की बातें<br />बला हर एक टल जाये, अगर तुम मिलने आ जाओ<br /><br />- जावेद अख्तर<br /><br /><small><a href="http://akshargram.com/paricharcha/viewtopic.php?pid=5515#p5515">यहाँ</a> से ढापा</small>आलोकnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1155830408094805352006-08-17T21:30:00.000+05:302006-08-17T21:30:08.136+05:30टाक-जी जो मित्र गण जी-टाँक का प्रयोग करते हैं उनके लिए एक और खुश खबरी ।।<br />नयी खूबियों के साथ नया जी-टाक ।।<br />1) फाइल शेयर<br />2) वाइस मेल<br />3) संगीत सूचक<br /><br />और जो नहीं प्रयोग करते हैं - किसका इन्तजार है भाई ।।<br />तो आज ही घर ले आएँ और <a href="http://www.google.com/talk/">फायदा</a> उठाएँ ।।<br />ओए टाक-जी ।।<br /><br />आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1155314330061542022006-08-11T22:08:00.000+05:302006-08-11T22:08:50.066+05:30अन्धा ही नहीं, लूला व लंगडा कानूनविस्फोट के 13 साल बाद <a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2006/08/060810_mumbai_judgement.shtml">सजा</a> सुनाई जा रही है ।<br /><br />75% आरोपी जमानत पर रिहा है, 11 सुनवाई के दौरान ईश्वर को प्यारे हो चुके हैं व बाकी जेल में हैं ।। <br /><br />देश के मुख्य न्यायाधीश को क्या कुछ फर्क पडेगा ये जानकर ।।<br />आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1154964390163853792006-08-07T20:50:00.000+05:302006-08-07T20:56:30.186+05:30साँफ्टवेयर = इंडियाअगर आप गूगल <a href=http://trends.google.com>ट्रैंडस</a> पर "code" पर सर्च करें तो प्रथम 5 शहर होंगे <br />1. Washington, DC, USA <br />2. San Diego, CA, USA <br />3. Los Angeles, CA, USA <br />4. New York, NY, USA <br />5. San Francisco, CA, USA <br /><br />और अगर "software code" पर सर्च करें तो प्रथम पाँच शहर होंगे <br />1. New Delhi, India <br />2. Chennai, India <br />3. Hyderabad, India <br />4. Bangalore, India <br />5. Delhi, India <br />6. Mumbai, India <br /><br />तो क्या साँफ्टवेयर = इंडिया ??आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1154961581072786492006-08-07T20:08:00.000+05:302006-08-07T20:09:41.073+05:30कमाँडो सहवागयकीन नहीं होता तो खुद <a href=http://www.bbc.co.uk/hindi/specials/1047_players_train/index.shtml>देख</a> लीजिए ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1154961301423828572006-08-07T20:01:00.000+05:302006-08-07T20:07:07.660+05:30जे एन यू के मामूक्या आप जे एन यू के मामू से <a href=http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/08/060805_phd_dhabha.shtml>मिलेंगे </a>।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1154960905792416492006-08-07T19:55:00.000+05:302006-08-07T19:58:25.826+05:30गूगल - अरविंदअरविंद हस्पताल गूगल के साथ हाथ मिला रहा है ।।<br />क्या टैक्स विभाग व परिवहन विभाग कभी कर पाएगा ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1153925879269701452006-07-26T20:27:00.000+05:302006-07-26T20:27:59.276+05:30मॅहगा शहरआपका शहर कितना मँहगा है ।। <a href="http://www.economist.com/printedition/displayStory.cfm?story_id=7194576&fsrc=RSS">पढिए</a> ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1153925387069810362006-07-26T20:19:00.000+05:302006-07-26T20:19:47.076+05:30मेहमानक्या आप <a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2006/07/060725_kerala_eater.shtml">इन्हें </a>घर पर दावत देंगे ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1153031657333836772006-07-16T12:04:00.000+05:302006-07-16T12:04:17.450+05:30गूगल संगीतआप में से काफी लोग गूगल डेस्कटाप का प्रयोग करते होंगे । मैं भी ।<br />पर जो नवीनतम संस्करण है, उसमें खास बातें मुझे दिखाई दीं वो हैं --<br />1) CTRL कुंजी को दो बार दबाने से सर्च खिड़की खुल व बन्द हो जाती है ।।<br />2) गूगल ने एक छोटा सा संगीत प्लेयर भी दिया है। गाने फोल्डर से ड्रैग गर ईसमें ड्राप कर दें ।। काफी मस्त है । फायदा है कि मेमोरी बहुत कम लेता है। प्रयोग करें । <br />3) साथ में एक घड़ी गैजैट भी है । <br />4) दो बार SHIFT कुंजी से आप गैजेट को प्रकट या गायब कर सकते हैं । वो क्या कहते है अंग्रेजी में - प्रिटी कूल ।।<br />5) और हाँ इस संस्करण में आप री-इंडेक्स कर सकते हैं जो पहले मुमकिन नहीं था ।। <br />प्रिटी कूल आई से ।।<br />आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1152941888615977122006-07-15T11:08:00.000+05:302006-07-15T11:08:08.656+05:30आँफिस आँफिसमित्रों,<br />सर्वप्रथम पिछले लेख पर टीका-टिप्पणी के लिए शुक्रिया ।<br /><br />मासोट ने गूगल की तर्ज पर अब बीटा रिलीज करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आँफिस 2007 का बीटा बाजार में उतारा है । खास बातें जो अब तक मैं जान पाया हूँ, <br />1) आँफिस के अलावा बहुत कुछ है पर सिर्फ फरवरी तक इस्तेमाल कर सकते हैं । उसके बाद जेब ढीली करें । कडी है - http://www.microsoft.com/office/preview/beta/getthebeta.mspx<br />2) आँउटलुक को sql सर्वर के साथ जोड़ने का प्रावधान दिया है । नाम है बिजनिस काँन्टेकट मैनेजर - फाँर स्माल बिजनिस, यू नो ।<br />3) संलग्न दस्तावेज को बिना अलग से खोले, आँउटलुक में ही झाँकी ले लेना ।<br />4) RSS फीड के लिए एक अलग फोल्डर होना और आँउटलुक में ही पढ लेना । डाउनलोड भी आँउटलुक में ही कर सकते हैं । जैसे समाचार ।<br />5) एम-एस वर्ड दस्तावेज का साइज 50% तक कम होना ।<br />6) सारे आँफिस सूट का लुक एंड फील बदल देना । <br />7) आँउटलुक के लिए अलग से छोटा डेस्कटोप सर्च । लगता है गूगल आँउटलुक सर्च ने मासोट की नींद उडा़ दी है । <br /><br />बाकी आप स्वयँ अनुभव कर लें ।।<br />अगले लेख में कुछ गूगल डेस्कटाप के बारे में ।<br /> आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1152548390341823192006-07-10T21:39:00.000+05:302006-07-10T21:49:50.353+05:30नयी तस्वीर<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://photos1.blogger.com/blogger/2493/766/1600/newlook-2.jpg"><img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/2493/766/320/newlook-2.jpg" alt="" border="0" /></a><br />हाल ही में मैंने अपनी कुछ तस्वीरें ली ।। कुछ समय से शुभचिंतक मुझे कह रहे थे - तस्वीर लगा लो । तो ये लीजिए गरमा गरम आपके सामने पेश हैं ।। दोनों में से जो आपको अच्छी लगे, कृपया टिप्पणी करें ।। पेड़ सहारे या समुद्र किनारे ।। लाइन्स हमेशा खुली हैं ।। जब चाहे टिप्पणी कर सकते हैं ।।<a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://photos1.blogger.com/blogger/2493/766/1600/newlook.0.jpg"><img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://photos1.blogger.com/blogger/2493/766/320/newlook.0.jpg" alt="" border="0" /></a>आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1145269962261406812006-04-17T16:02:00.000+05:302006-04-17T16:02:42.273+05:30आपका स्कोर क्या है ।<div xmlns="http://www.w3.org/1999/xhtml">क्या 36-24-36 कम था जो ये आ गया । <br/> /> </div>आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1144915907553777332006-04-13T13:41:00.000+05:302006-04-13T13:41:47.563+05:30वही पुरानी बातक्या भगवान पुरुष है या स्त्री ?रश्मी जी क्या कहती हैं <a href="http://youthcurry.blogspot.com/2005/06/one-thing.html"><पढिए></a>; (अंग्रेजी ब्लाग है)आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1144908155453186982006-04-13T11:32:00.000+05:302006-04-13T11:32:35.480+05:30आरक्षण<div xmlns="http://www.w3.org/1999/xhtml">भारत में रहना अब और भी चैलेंचिंग होने वाला है । <br/>सरकार अब शिक्षण संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण करने वाली है । <br/>तो अब हमारे छोटे भाई बहन जो जी तोड मेहनत कर रहे हैं, मूर्ख हैं । <br/>क्योंकि कोई उससे कम योग्य होते हुए भी जाति के आधार पर प्रवेश पा लेगा । <br/><br/>क्या ये करने से देश व समाज का भला होगा ?<br/>या जातिवाद, घूसघोरी को बढावा मिलेगा । <br/>यह कदम सिस्टम को मजबूत करेगा या उसे और कमजोर करेगा ?<br/><br/>मेरा मानना है कि जिनके पास साधन नहीं है पर प्रतिभा है, उन्हें साधन प्रदान किए जाने चाहिए, चाहे वो किसी भी जाति के हों । पर परीक्षा में चयन सिर्फ योग्यता पर होना चाहिए । <br/>मतलब सरकार व समाज पढाई के लिए जो हो सकता है करे, ट्यूशन फीस माफ करे, किताबों का इन्तजाम करे, कोचिंग की व्यवस्था करे और एक ऐसा सहयोग दे कि साधनाभाव का एहसास न हो । <br/><br/><br/>आप क्या सोचते हैं ?<br/></div>आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1144127729669375692006-04-04T10:45:00.000+05:302006-04-04T10:45:29.680+05:30विदेश का चस्का<div xmlns="http://www.w3.org/1999/xhtml">मित्रों,<br/>हम लोगों में विदेश का जो चस्का है, वो देखते ही बनता है। <br/>घर परिवार, जान पहचान में कहीं भी कोई अगर विदेश जाता है तो चर्चा और आदर का पात्र बन जाता है।<br/><br/>मेरे ससुराल पक्ष से एक व्यक्ति 1 हफ्ते के लिए बाहर क्या हो आया, बस पूछो मत । <br/>जब भी घर में कोई बात हो, तो वहाँ का जिक्र जरूर । <br/>जैसे वहाँ तो कपडे धोने के लिए मशीनें ही मशीने, कोई खुद धोता ही नहीं और लहजा ऐसे जैसे कि जब तक कपडे उसी तरह से धुल न जाँए, जैसे कि बाहर होता है, उसे पहनना शर्म की बात है।<br/><br/>किसी दोस्त का लडका बाहर चला जाए तो पिताजी रोज उसकी चर्चा नित्यकर्म माफिक करें । <br/>चाहे खुद का लडका, सेवा कर के थक जाए ।<br/><br/>ये हीन भावना जाने कब जाएगी ..<br/></div>आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1130237642412855382005-10-25T15:25:00.000+05:302005-10-25T16:24:02.423+05:30मैट्रो - आज तककुछ समय पहले मैंने दिल्ली मैट्रो पर एक लेख लिखा था ।<br />मैट्रो में प्लेटफार्म पर जाने के लिए बैरियर पर लगी स्क्रीन पर अपना टिकिट दिखाना पड़ता है ।<br />स्क्रीन टिकिट को पढ़ कर गेट खोल देती है । अब किसी को पास चाहिए तो वो क्या करे ।<br />एक बड़ी टिकिट खरीदे जो धीरे धीरे खत्म होती जाए । नहीं ।<br />अभी हाल ही में एक और सुखद समाचार मिले ।<br /><br />आप एक कार्ड, क्रैडिट कार्ड जैसा, खरीद सकते हैं जिसमें कुछ चार्ज रहता है । जैसे जैसे यात्रा करें चार्ज राशि अपने आप घटती है जैसा मोबाइल में होता है । बस आप कार्ड को बैरियर पर दिखा दें । खास बात है कि कार्ड कपड़ों या पर्स में से भी काम करता है । स्त्रियों के लिए कितनी सुविधा - बस पर्स आगे किया और प्रवेश पाया । री-चार्ज करने पर 50 की छूट ।<br />क्या पता आगे ये आपके मोबाइल से जुड़ जाए, बस मोबाइल दिखाओ और प्रवेश पाओ ।<br />और अपने आप मोबाइल के बिल में टिकिट किराया आ जाएगा । कोई नगद का झंझट ही नहीं ।<br />और कोई पहले से टिकिट खरीदने जी जरूरत भी नहीं ।<br />सुरक्षा की द्रष्टि से बहुत उत्तम है क्योंकि पता किया जा सकता है कि कौन जा रहा है ।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1129876348266762962005-10-21T11:53:00.000+05:302005-10-21T12:25:37.753+05:30पद बड़ा कि कार्यहाल ही में इंडिया टुडे में एक लेख आया है कि हैदराबाद के पूर्व पुलिस कमिश्नर रैड्डी ने सरकार के खिलाफ कोर्ट केस किया है ।<br />आप कहेंगे उसमें नया क्या है , रोज ही होता है ।<br />नया है कारण और उससे ज्ञात होता देश के रहनुमाओं का स्वार्थ।<br /><br />कारण है, प्रोटोकोल । यानि राष्ट्रपति जब आऐं तो हाथ मिलाते की कतार में आप कहाँ खड़े हैं ।<br />कौन कहाँ खडा़ होगा इस बात पर बवाल ।<br />कुछ समय पहले कोई और इनके आगे खडा़ हो गया जो गलत था और उसकी शिकायत भी हुई ।<br />पर फिर से वही बात दुहराई गई तो रैड्डी ने दूसरे को धक्का दे खुद को आगे किया ।<br />चीफ सैकेट्री ने नाराज हो, रैड्डी को चिट्ठी भेज दी । रैड्डी ने कहा, तुम कौन ।<br />बस, चीफ सैकेट्री बुरा मान गये और रैड्डी को रिटायरमेंट से दस दिन पहले तबादिल कर दिया, बिना आँध्र प्रदेश के डी जी पी को बताए ।<br />रैड्डी ने केस ठोक दिया ।<br />आँध्र प्रदेश आजकल नक्सली समस्या से झूज रहा है और कई लोग मारे जा चुके है ।<br />पर इन बाबूज़ को कौन समझाए । इनका क्या जा रहा है । प्रोटोकोल ज्यादा जरूरी है ।<br />एक्जैक्टली ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1129704558086240932005-10-19T12:07:00.000+05:302005-10-19T12:19:18.090+05:30एफ डी आई - चाही के नाहींये एफ डी आई नाम का जानवर हर देश में मौजूद है , चाहे विकसित हो या विकासशील ।।<br />भारत के नीति निर्माता तो इसे देश की प्रगति का आधार मानते हैं और प्यार पुचकार में कोई कमी नहीं रखते ।।<br />पर आखिर ये चाहिए ही क्यों ??<br />कृपया टिप्पणी करें ।।<br />मैं इस विषय पर एक बहस शुरू करना चाह रहा हूँ ।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1129617985909952682005-10-18T11:56:00.000+05:302005-10-18T12:16:25.916+05:30सर उठा के - माई फुटआजकल एक शीतल पेय का विज्ञापन आ रहा है कि आप सर उठा कर पीओ। और दिखाया जाता है कि सब बोतल को मुँह लगा कर गटागट पी रहे हैं । पर आप कितनी बार सर बिना ऊपर किए बिना चुपचाप स्ट्रा से या गिलास से पी जाते हैं । क्या वो सर झुका कर पीना हुआ ?<br />क्या कोक पीने से आपका सिर ऊपर होता है ?<br />क्या बकवास है ?आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1129447452781376712005-10-16T12:50:00.000+05:302005-10-17T10:57:43.540+05:30झूठ बोलता है<a href="http://googlism.com/">गूगलिस्म</a> के तिलिस्म का कहना है कि उसे हिन्दी के बारे में कुछ पता नहीं है।<br /><blockquote><br />Warning: Invalid argument supplied for foreach() in /usr/dbs_share/www/shared/include/googlism.com/private/googlism.inc on line 41<br />Sorry, Google doesn't know enough about हिन्दी yet.<br /></blockquote><br />झूठ बोलता है!<br /><a href="http://www.google.co.in/search?q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80&sourceid=mozilla-search&start=0&start=0&amp;ie=utf-8&oe=utf-8&client=firefox-a&rls=org.mozilla:en-US:official">हिन्दी</a>आलोकnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1129207951434951102005-10-13T18:22:00.000+05:302005-10-17T12:05:39.623+05:30अमरीका – कितना मीठा कितना फीकाअमरीका – कितना मीठा कितना फीका<br />कहते हैं चरित्र की पहचान संकट या विपत्ती के समय होती है ।<br />हाल ही में अमरीका में आए प्राक्रतिक आपदा के समय वहाँ के वासियों की कारगुजीरियों पर अगर यह सिद्धाँत लागू करें तो आपका निष्कर्ष क्या होगा ?<br />चाहे आप कोई भी पक्ष की तरफ हों, अब अंकल सैम अपनी नैतिकता व मौलिकता का ढिंढोरा नहीं पीट सकते । पर वे शायद ही आदत से बाज आए, जो है दूसरे के फटे में अपनी टाँग अडाने की । चाहे वह ईराक हो या ईरान या कोरिया । विश्व शाँति के नाम पर सबसे ज्यादा अशाँति तो अंकल फैला रहै हैं । वॉर अगैंस्ट टैरर ।।<br /><br />हाल ही में “टाइम” पत्रिका में मैं पढ़ रहा था कि हरीकेन के समय “कोंडम” टॉप सैलर थे और तूफान के बाद सबसे पहले और अकेले खुलने वाला प्रतिष्ठान था, सही सोचा, स्ट्रिप बार ।। क्या बात है । चाहे और कुछ हो न हो , रंगीनियाँ तो होनी ही चाहिए, क्या पता कल हो न हो ।।<br /><br />मैं किसी की बुराई नहीं कर नहीं कर रहा हूँ पर यही कह रहा हूँ कि जब कपडों के अन्दर सभी नंगे हैं तो किसी को अपने कपड़ों पर घंमंड करना कितना ठीक है ।।<br /><br />इतने दिनों बाद यही विषय ठीक लगा लिखने के लिए ।।<br />क्या बोला ।। एक्जैक्टली ।।।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15924140964649125080noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10103919.post-1121238330826971542005-07-13T12:35:00.000+05:302005-07-13T12:44:27.483+05:30अनुवाद बहुत से किए होंगे तुमनेलेकिन लाइवजर्नल का जो अनुवाद का अन्तरापृष्ठ है, उसका कोई मुकाबला नहीं। एक तो यह ऑन्लाइन है, यानि आप दुनिया में कहीं बैठे हों, अनुवाद कर सकते हैं, और दूसरा, इसमें एक ही पन्ने पर सिलसिलेवार कई वाक्य अनुवाद करने के लिए हैं, तो आप तारतम्य बिठा सकते हैं कि क्या अनूदित किया जा रहा है। साथ ही, यदि कोई मूल वाक्य बदल जाता है, तो वह भी दुबारा इसमें आपके सामने आ जाता है, ताकि सब कुछ सामयिक रहे। तो फिर देर किस बात की है? या तो <a href="http://www.livejournal.com/manage/siteopts.bml">ई-आम</a> खाइए, या फिर <a href="http://www.livejournal.com/translate/edit.bml?lang=hi">ई-गुठलियाँ</a> गिनिए, या फिर <a href="http://www.livejournal.com/community/lj_translate">दोनो</a> ही करिए! जो भी हो, ई-लेखा जारी रखिए। <br /><br /><a href="http://www.akshargram.com/2005/07/13/448">विस्तृत जानकारी</a>आलोकnoreply@blogger.com